"ज़िंदगी और मौत" 





                    डा. सलोनी चावला


ज़िंदा हो तो लोग तुम्हें नीचे गिराएंगे, 

मर जाओ तो वही तुम्हें कांधे पर उठाएंगे। 


जीते जी करते रहे जो तिरस्कार तेरा, 

शव यात्रा से पहले तेरी पूजा कराएंगे।

 

ज़िंदगी भर किया हो तुझको लाख बदनाम, 

शमशान घाट पर वही तेरे गुणगान भी गाएंगे। 


उम्र भर छीने जिसने लोगों के पहनाए हार, 

वही तेरे बाद, तेरी तस्वीर पर हार पहनाएंगे।


जीवन भर तेरी शांति को भंग करने वाले, 

मौत पर तेरी आत्म - शांति की अरदास लगाएंगे। 


   रचयिता - डा. सलोनी चावला

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