🙏आज तुमसे कह रहा हूं 🙏


       
           

हमसे दुनिया पूछती है ।
इस प्रीत का पावन परिचय ।।

कैसे मैं सबको , बता दूं ।
आपका मन भावन परिचय ।।

कैसे दूं परिचय तुम्हारा ।
तुम से जब वादा किया है ।।

नाम तुमसे जोड कर यूं ।
हमने जब वादा किया है ।।

कैसे बताऊ , मैं इस जग को  ।
प्रणय निवेदन किसका रहा ।।

मैं इसे  संयोग  कहता ।
प्रणय निवेदन, जिसका रहा ।।

इस जन्म से उस जन्म तक ।
है मिलन ये आत्मा का ।।

एक है , एक दूसरे के ।
आशीष है ,परमात्मा का ।।

आपकी हर बात को ।
हमने है ,स्वीकार किया  ।।

जैसे हो तुम इस जन्म में ।
हमने अंगीकार किया ।।

आपकी हर भावना  से ।
हमने खुद को संग किया ।।

आपकी इस प्रीत में ।
हमने मन को रंग लिया ।।

इस जन्म से उस जन्म तक ।
तुम ही तुम स्वीकार हो ।।

मर भी जाऊं इस
जन्म तो ।
फिर तुम्ही से प्यार हो ।।

तुम अगर यूं रूठ जाओ
याद मै ।
किसको करूंगा ।।

तुम मिलोगे ,न कभी तो
फिर मैं ।
जी कर, क्या कंरूगा ।।

दूर तुम मुझसे नही हो ।
दूर मैं तुमसे नही ।।

मानता है दिल हमारा ।
दूर तुम हमसे नही ।।

आप रहने दो ये
मुझ पर ।
स्नेह की  प्यारी  ऋतु ।।

नेह - नाते  ना रहे फिर
किस ।
काम की प्यारी ऋतु ।।

पाकर तुम्हें  पोषित हुआ ।
प्यार का पहला बंसत ।।

आखिरी अब सांस तक ।
इसको रहना है अंन्नत ।।

देव की दुनिया तुम्ही से ।
प्यार का अनुराग तुम हो ।।

तुमसे है जीवन हमारा  ।
जीवन का अब भाव तुम हो ।।

तुमसे है , अब ये जीवन ।
बिन सहारे मैं जी ना सकूंगा ।।

तुम  ही  गर  हो  गए  पराए ।
विष विरह का , ना पी सकूंगा ।।

देखने में हूं किला सा
पर खंडहर सा
ढह रहा हूं ।।

देह मेरी,  आपका  मन ।
लो आज तुमसे
कह रहा हूं ।।

झील सा ठहरा  सदा मै ।
अब नदी सा बह रहा हूं ।।

हर घड़ी,  हर पल यहां मैं ।
बिन तुम्हारे रह रहा हूं ।।

आप हो तो , मैं हूं जग में 
है  रितुदेव का राग भी ।।

आपका है देव अब तो ।
ये प्यार भी अनुराग भी ।।

आप हो दीपक स्नेह का
हम ठहरे दीपक की बाती

प्रीत सदा अधरों पर होगी ।
बन गए एक दूजे के साथी ।।

यदि एक दूजे के बिना ही ।
इस जन्म जीना पडेगा ।।

बन्धन है दोनों
पर लाखों ।
तो जीना पडेगा - जीना पडेगा ।।

देवेन्द्र सिसौदिया " देव मित्र "
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